ICAI Invites suggestions on GST Acts and Rules

By | June 6, 2017
(Last Updated On: June 6, 2017)

Dear Professional Colleague,

Greetings from Indirect Taxes Committee!

The Central government has been taking various steps towards the implementation of the country’s most ambitious indirect tax reform of Goods and Services Tax which is expected to roll out from 1st July 2017. The GST Act(s) have been finalised along with 8 GST Rules as approved by GST Council.

The Indirect Taxes Committee is in the process of collating the suggestions on GST Acts and all the GST Rules (draft as well as approved) for submission to the government. In this regard we request you to provide us with your suggestions on GST Act(s) and Rule(s), if any, in the below format:

Section No./ Rule No.Heading of the IssueIssueSuggestionJustification

We request you provide your suggestions by e-mail at suggest.idtc@icai.in preferably by 15th June, 2017.

In case on any clarifications required, please contact Secretary, Indirect Taxes Committee at idtc@icai.in or 0120-3045954.

Warm Regards

Chairman

Indirect Taxes Committee

Vice Chairman

Indirect Taxes Committee

 

 

One thought on “ICAI Invites suggestions on GST Acts and Rules

  1. J P Madvaiya

    JP Madvaiya १५ जून, २०१७.

    माननीय प्रधान मंत्री जी,
    भारत सरकार, नयी दिल्ली.

    सम्मानीय महोदय,

    १८ जून २०१७ को अति महत्वपूर्ण मीटिंग होने वाली है, इस मीटिंग के लिए आपके माध्यम से मैं निम्नांकित विचार प्रस्तुत करना चाहता हूँ और आपसे अनुरोध करता हूँ कि इन विन्दुओं को काउन्सिल के पटल पर अवश्य रखवाया जावे, जिससे GST एक सुखद अहसास के साथ व्यापार जगत में प्रवेश पा सके. GST एक अच्छी प्रणाली है जो देश के व्यापार को गति देगी. आप चाहते हैं की तकनीक और डिजिटल पद्धति का व्यापार में भरपूर उपयोग हो, अत: अनुरोध है निम्नांकित बिन्दुओं पर विचार कर इस प्रणाली को और सुगम और सर्वग्राह्य बनाने का प्रयास कीजिए :

    1) GSTN ID / ARN ID का उपनाम (Alias) BARCODE या QR CODE में भी हो. प्रत्येक पंजीकृत कारोबारी- उत्पादक, वितरक, क्रेता के इनवॉइस पर उस फर्म के नाम के साथ उसके नाम का BARCODE या QR CODE भी छपा हो. इससे इनवॉइस जारी करने वाले कारोवारी के नाम को स्कैन कर Trace करना आसान हो सके.
    2) HSN Code, GST Rate और MRP BARCODE में समाहित हों. ये यूनिक कोड हर वस्तु के लिए इनवॉइस बनाते समय प्रोडक्ट कोड की तरह प्रयुक्त हों. इनको स्कैन कर बिल/इनवॉइस बनाया जा सके. उत्पादक इन बारकोड को अपने उत्पाद पर उत्पादन के समय ही प्रिंट कर देवे. आगे के कारोवारी इन बारकोड का उपयोग अपने बिल/इनवॉइस बनाने में स्कैन कर कर सकते हैं.
    3) GST की जानकारी के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम अनिवार्यत: चलाये जावें, जिससे GST के प्रावधानों को कारोवारी को आत्मसात करने में मदद मिलेगी. सही रूप से HSN Code का उपयोग करते हुए निर्दिष्ट टैक्स रेट पर इनवॉइस बनेंगे तो विवरणी भी सही जावेगी, व्यापारी को समयबद्ध विवरणी अपने कंप्यूटर/इन्टरनेट सिस्टम से भेजने में कोई परेशानी नहीं होगी. कोई Query उत्पन्न नहीं होगी. सभी का समय, टेंशन बचेगा.
    4) HSN Code और GST रेट की वर्गीकृत सूची व्यापार के अनुसार बनायीं जावें और संबंधितों को प्रसारित हो. जिससे कारोवारी को किसी प्रकार की दुविधा, भ्रम या असमंजस न हो. जैसे : सेनेटरी, हार्डवेयर, स्टेशनरी, किराना, दवा विक्रेता, ऑटो पार्ट्स विक्रेता आदि-आदि………
    5) Software बनाने वालों को चाहिए कि वे ऐसे सॉफ्टवेयर बनायें जिसमे उपर्युक्त Barcode या QR कोड जेनरेट करने की सुविधा हो. इस प्रकार के Software बनाने के लिए GST काउंसिल द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिए.
    6) एक वर्ष से अधिक पुराने बिलों पर, (FMCG की वस्तुओं को छोड़कर) अमान्यता न हो : व्यापारी अपने अनुमान से विक्रय करने के लिए किसी वस्तु का क्रय करता है, उसका अनुमान उस वस्तु की मांग न आने पर साल भर से अधिक बिकने से रह जाता है. इस वस्तु के स्टॉक पर उसकी पूंजी फँसी रहती है, गोडाउन का भाडा लगता है, बैंक का ब्याज भी चलता है, टैक्स तो वह क्रय करते समय दे ही चुका होता है, फिर उसे पुन: उस वस्तु पर GST के प्रावधानों के अनुसार नुक्सान न भुगतना पड़े, ऐसे प्राबधान होना चाहिए. यदि व्यापारी घाटा खाने से बचेगा तो वह टैक्स का भुगतान भी बढ़ी हुयी आय पर कर सकेगा, सरकार को रेवेन्यू भी बढ़कर ही मिलेगी.
    7) यह सुनिश्चित हो कि जिस ऑफिसियल साईट पर डाक्यूमेंट्स १५ जून २०१७ तक प्रस्तुत करने थे, इस साईट ने सपोर्ट नहीं किया है. वह बिना रुके चालू रहे. बहुत से व्यापारियों के डाक्यूमेंट्स अपलोड होने से रह गए हैं. इसलिए सबमिशन करने के लिए ३० जून २०१७ तक का समय दिया जाना चाहिए.
    8) डिजिटल प्रणाली का सारा दारोमदार नेट कनेक्टिविटी पर निर्भर करता है. नेट कनेक्टिविटी में कंही भी कोई खामी होगी तो सारी व्यवस्था चरमरा जावेगी. GST की सफलता पूरी तरह से इन्टरनेट से जुडी हुई है.
    GST के प्रावधान व्यापारी मित्र (Trader Friendly) की तरह होंगे तो व्यापार जगत का भरपूर सहयोग मिलेगा और GST हमारे व्यापारिक जीवन का अंग बन पूरी तरह सफलता की और जावेगा, इसी शुभ कामना के साथ.
    भवदीय,
    जीवन प्रकाश मड्वैया
    मोबा: 9425600922

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